बड़ी साफगोई से पुकारा उसने
लगा की कान्हा पुकारा उसने
सूर्य भी बस एक टक तकता रहा
जब कभी रेशमी जुल्फों को संवारा उसने
चौदह दिन लगे बस चाँद को पिघलने में
जिस दिन से मेरे चाँद को निहारा उसने
रस्मन जो मुझे देख के मुस्काई वो
लगा की फिर कोई किया है इशारा उसने
और यूँ ही नहीं है मेरी चाल का मतवालापन
किसी से जिक्र किया है हमारा उसने